अभिषेक सिंह ‘कुटज’: हिंदी कवि और मेरे हिस्से की खुशी के लेखक
अभिषेक सिंह ‘कुटज’ बेंगलुरु में रहने वाले भारतीय हिंदी कवि और लेखक हैं, जिनकी रचनाएं खुशी, राजनीति, सामाजिक असमानता, रिश्तों और आम जीवन की वास्तविकताओं को संवेदनशीलता से सामने लाती हैं।on Sep 04, 2026
अभिषेक सिंह ‘कुटज’ समकालीन हिंदी साहित्य के कवि और चर्चित कविता संग्रह मेरे हिस्से की खुशी के लेखक हैं। मेरठ और लखनऊ से बेंगलुरु तक की उनकी जीवन-यात्रा में अनेक अनुभव, संघर्ष और सीख शामिल रहे हैं। अलग-अलग शहरों, लोगों और परिस्थितियों के बीच बिताए गए समय ने उनकी साहित्यिक दृष्टि को गहराई दी है।
करीब तीन दशकों तक विभिन्न कार्यक्षेत्रों में सक्रिय रहे अभिषेक सिंह मानते हैं कि उन्हें किताबों से अधिक जीवन ने सिखाया है। अपने आसपास के लोगों, संबंधों, सामाजिक परिस्थितियों और बदलते परिवेश को वर्षों तक करीब से देखने और समझने का प्रभाव उनकी कविताओं में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
उनका हिंदी कविता संग्रह मेरे हिस्से की खुशी व्यक्तिगत भावनाओं के साथ सामाजिक और राजनीतिक वास्तविकताओं को भी अभिव्यक्त करता है। इसकी कविताएं खुशी, भूख, रोटी, संघर्ष, गरिमा, रिश्तों, असमानता और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे विषयों पर पाठकों को सोचने के लिए प्रेरित करती हैं।
अभिषेक सिंह की लेखन शैली सरल, संवेदनशील और विचारोत्तेजक है। उनकी कविताएं पाठकों को तैयार उत्तर देने के बजाय प्रश्नों के माध्यम से आत्मचिंतन की ओर ले जाती हैं। वे व्यक्तिगत अनुभवों को समाज और राजनीति के व्यापक संदर्भ से जोड़ते हैं, जिससे उनकी रचनाएं समकालीन हिंदी कविता और सामाजिक सरोकारों में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक बनती हैं।
लेखन के साथ-साथ अभिषेक सिंह मेरे हिस्से की खुशी नामक सामाजिक मंच के माध्यम से लोगों को जोड़ने और समाज में मौजूद दूरियों को कम करने का प्रयास कर रहे हैं। उनका साहित्य इसी उद्देश्य का विस्तार है, जहां कविता संवाद, संवेदना और सामाजिक जागरूकता का माध्यम बनती है।
उनकी पुस्तक अमेज़न पर उपलब्ध है।
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